Chudakarana


हमारे ऋषि महर्षियों द्वारा बताये गए संस्कारों की वैज्ञानिक प्रासंगिकता है। ऋषि मुनियों द्वारा बनाए गए संस्कार के वैज्ञानिक आधार हैं। अगर हम चूड़ाकरण या मुंडन संस्कार के पृष्ठभूमि के बारे में विचार करे तो बहुत सी सच्चाई और रहस्य सामने आते हैं। जो सांस्कृतिक होने के साथ साथ वैज्ञानिक महत्व भी रखते हैं। साधारण दृष्टि से देखा जाये तो इस संस्कार में बालक के जन्म के पश्चात पहली बार उसके बाल को उतरा जाता है जिसका, विकास माँ के गर्भ में हुआ होता है। और अधिक गहराई से इस संस्कार में बारे में जानने की कोशिश karen तो कई महत्व पूर्ण गूढ़ बाते सामने आती हैं।

यह 8वां संस्कार जातक के जन्म से विषम वर्ष में किया जाता है। विषम वर्ष यानि पहला वर्ष, तीसरा वर्ष, पांचवा वर्ष या सातवाँ वर्ष। पहले वर्ष में यदि बालक माँ मुंडन संस्कार करना है तो बालक को १ बर्ष का होने से पहले यह संस्कार कर लेना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस संस्कार के लिए सम वर्ष को त्याज्य बताया गया है। सबसे बड़े पुत्र के चूड़ाकरण संस्कार के लिए सूर्य का वृष राशि में होना शुभ माना जाता है। अगर मुंडन संस्कार किये जाने वाले बालक की आयु ५ वर्ष से अधिक है और माँ पांच महीने से अधिक गर्भवती है तो यह संस्कार नहीं करनी चाहिए।